हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हज़रत आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई, इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने एक संदेश जारी कर डॉ. अली लारिजानी राष्ट्रीय सुरचा परिषद के सचिव और उनके पुत्र और उनके कुछ सहयोगियों की शहादत पर शोक व्यक्त किया है।
संदेश का पाठ कुछ इस प्रकार है:
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
بسمالله الرحمن الرحیم
ولاتَحسبَنَّ الّذینَ قُتِلوا فی سبیلِاللهِ اَمواتاً بَل اَحیاءٌ عِندَ رَبِّهِم یُرزَقون
और जो लोग अल्लाह की राह में मारे गए, उन्हें कभी मृत न समझो, बल्कि वे जीवित हैं, अपने रब के पास आजीविका प्राप्त कर रहे हैं।(कुरान, आले-इमरान: 169)
अत्यधिक खेद के साथ मुझे राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और उस परिषद में नेता के प्रतिनिधि श्री डॉ. अली लारिजानी, उनके सम्मानित पुत्र और उनके कुछ सहयोगियों की शहादत का हृदय-विदारक समाचार प्राप्त हुआ।
वे एक विद्वान, दूरदर्शी, बुद्धिमान, प्रतिबद्ध और विभिन्न राजनीतिक, सैन्य, सुरक्षा, सांस्कृतिक और प्रबंधन क्षेत्रों में विविध अनुभव रखने वाले व्यक्ति थे।
लगभग पाँच दशकों तक इस्लामी व्यवस्था के विभिन्न स्तरों पर उनकी भूमिका ने उन्हें एक विशिष्ट व्यक्तित्व प्रदान किया था।
निस्संदेह, ऐसे व्यक्तित्व की हत्या, उसके महत्व और इस्लाम के शत्रुओं द्वारा उसके प्रति रखी गई घृणा की मात्रा को दर्शाती है।
इस्लाम-विरोधियों को पता होना चाहिए कि इस्लामी व्यवस्था के मजबूत वृक्ष की जड़ों में यह रक्त सींचना इसे और अधिक मजबूत बनाएगा, और निःसंदेह, हर खून का एक बदला होता है, जिसे शहीदों के आपराधिक हत्यारों को शीघ्र ही चुकाना होगा।
मैं इस क्षति पर उनकी सम्मानित पत्नी और अन्य बच्चों के साथ-साथ अन्य संबंधियों, विशेष रूप से जनाब आयतुल्लाह आमोली लारिजानी के प्रति हार्दिक शोक-संवेदना व्यक्त करता हूँ और परवरदिगार के दरबार से इन दिवंगत लोगों के लिए ऊँचे दर्जे की दुआ करता हूँ।
सैय्यद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई
19 मार्च 2026
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